Dwarka Temple : श्रीकृष्ण की नगरी का दिव्य धाम

द्वारका मंदिर: श्रीकृष्ण की नगरी का दिव्य धाम

भारत के चार पवित्र धामों में से एक, द्वारका न केवल एक तीर्थस्थल है, बल्कि यह भगवान श्रीकृष्ण की राजधानी रही है। गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में स्थित द्वारकाधीश मंदिर हिन्दू धर्म के सबसे प्रमुख और पवित्र स्थलों में गिना जाता है। इसे ‘मोक्शपुरी द्वारका’ भी कहा जाता है, जहाँ आने से आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

इतिहास और मान्यता

द्वारका का अर्थ है – “द्वार (दरवाज़ा) + का (मोक्ष का)”, अर्थात् मोक्ष का द्वार। यह वह पावन नगरी है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद बसाया था और जहाँ उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे।

द्वारकाधीश मंदिर को ‘जगद मंदिर’ भी कहा जाता है। यह मंदिर 2,000 से भी अधिक वर्ष पुराना माना जाता है, हालांकि वर्तमान मंदिर का निर्माण लगभग 15वीं-16वीं शताब्दी में गुजरात के वाघेला और चूड़ासमा राजाओं द्वारा किया गया।

 

मंदिर की भव्य वास्तुकला

  • मंदिर गोमती नदी के तट पर स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 80 मीटर (250 फीट) है।
  • मंदिर के शीर्ष पर ध्वज लहराता है जो प्रतिदिन पाँच बार बदला जाता है। यह ध्वज सूर्य और चंद्र के प्रतीक के साथ होता है।
  • मंदिर में प्रवेश के लिए 56 सीढ़ियाँ हैं जो गोमती घाट से जुड़ती हैं।
  • गर्भगृह में श्री द्वारकाधीश (श्रीकृष्ण) की काले पत्थर की भव्य मूर्ति स्थित है।

गोमती नदी और संगम तट

मंदिर के पास से ही गोमती नदी बहती है, जिसे गंगा की एक शाखा माना जाता है। श्रद्धालु यहाँ स्नान कर के मंदिर में प्रवेश करते हैं। गोमती घाट से नाव द्वारा गोमती संगम और अन्य छोटे मंदिरों का दर्शन भी किया जा सकता है।

 

धार्मिक महत्व और तीर्थ यात्रा

द्वारका मंदिर को चार धाम यात्रा (बद्रीनाथ, रामेश्वरम, पुरी और द्वारका) तथा सप्त पुरियों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। वैष्णव भक्तों के लिए यह मंदिर अत्यंत पवित्र है।

यहाँ सालभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, विशेषतः:

  • जन्माष्टमी (श्रीकृष्ण जन्मोत्सव)
  • रथ यात्रा
  • दीवाली और होली के अवसर पर विशेष पूजन होता है।

कैसे पहुँचें द्वारका

  • हवाई मार्ग: निकटतम एयरपोर्ट जामनगर (137 किमी) है।
  • रेल मार्ग: द्वारका रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
  • सड़क मार्ग: गुजरात के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा द्वारका आसानी से पहुँचा जा सकता है।

दर्शनीय स्थल (मंदिर के पास)

  • रुक्मिणी देवी मंदिर – द्वारकाधीश की पत्नी को समर्पित।
  • बेत द्वारका – समुद्र में स्थित, नाव से पहुँचा जाता है।
  • नरसिंह मंदिर, गोपी तालाव, शारदा पीठ आदि प्रमुख स्थल हैं।

निष्कर्ष

द्वारका मंदिर केवल एक ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, प्रेम, और भक्ति की जीवंत मिसाल है। यहाँ की हवा में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगंध है, और हर भक्त को यहाँ आकर ऐसा लगता है मानो वे स्वयं द्वापर युग में पहुँच गए हों।

जय श्रीकृष्ण! जय द्वारकाधीश!

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